Iran US Deal: दशकों से तनाव वाले संबंधों के बाद अब ईरान और अमेरिका के रिश्तों की नई शुरुआत हो सकती है। इसका संकेत ईरानी विदेश मंत्रालय ने दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इशारा किया है कि ईरान और अमेरिका के बीच संभावित डील पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन साइन कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह ईरान और अमेरिका दोनों देशों के संबंधों का ऐतिहासिक कदम माना जाएगा।
कूटनीतिक प्रयासों से डील होने की तरफ बढ़े अमेरिका-ईरान
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सरकारी टेलीविजन से बातचीत में यह इशारा किया है। इस्माइल बघाई ने कहा कि दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों के परिणामस्वरूप ऐसी डील मुमकिन हो सकती है, जिस पर दोनों राष्ट्राध्यक्षों के स्तर पर साइन किए जाएं।
पिघलेगी ईरान-अमेरिका के रिश्तों की बर्फ!
माना जा रहा है कि इस प्रकार का हस्ताक्षर समारोह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि यह 4 दशक से ज्यादा वक्त से चली आ रही टेंशन को कम करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है। 1980 से अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास में बंधक संकट के बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंध टूट गए थे। तभी से दोनों देशों के बीच रिश्ते हमेशा उतार-चढ़ाव और टकराव वाले रहे।
न्यूक्लियर हथियार नहीं रखने पर राजी है ईरान- ट्रंप
हालांकि, जब ईरान डील पर साइन होने के संकेत दे रहा है, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप का ताजा बयान है कि ईरान के साथ जो डील हुई है, उस पर जल्द ही साइन हो जाएंगे। वे डील करना चाहते हैं और उनका व्यवहार भी काफी सही रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान इस बात पर राजी हो गया है कि वह न तो न्यूक्लियर हथियार बनाएगा और न ही उसे हासिल करेगा।
डोनाल्ड ट्रंप की इजरायल को नसीहत
ट्रंप ने आगे कहा कि हमने इजरायल को भी इसकी एक कॉपी भेजी है। वे हमारे अच्छे साथी रहे हैं। मुझे लगता है कि हिज्बुल्लाह के केस में वे और बेहतर कर सकते हैं। मैं ये नहीं कहता कि उन्हें अपना बचाव नहीं करना चाहिए। मैं बस इतना कह रहा हूं कि बेरूत में बिल्डिंग्स गिराने की जरूरत नहीं है।
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